| گذرگاه دیماه 1385 | شماره 62 | ششمین سال فعالیت |
| رئالیسم | آریو ساسانی |
| شکنجه گری | محمود صفریان |
| تا کجا می توان خِفت را کشید | کمال دماوندی |
| بر رسی ادبیات فارسی در اینترنت | محمود صفریان |
| به آن ها که فرصت طلبانه تن به خواری می دهند | گیسو شاکری |
| نقطه پرگار | آریو ساسانی |
| فاخته ای با چمدان عنابی | محمود کویر |
| علیرضا افتخاری | علی میرعطائی |
| نظری اجمالی به نقد | محمود صفریان |
| یلدا | شورای نویسندگان |
| پاسخ به یک نامه....زیر بوته لاله عباسی | شورای نویسندگان |
| چون پرده بیفتد... | ایرج هراتی |
| دانشگاه آزاد | |
| خبر با مزه ماه | محمود احمدی نژاد |
| تولد | |
| کتابخانه | |
| علفزاز........تابلوی نقاشی | منصوره اشرافی |
| سر بلند......تابلوی نقاشی | منصوره اشرافی |
| میوه های تلخ | |
| شب شعر | سید علی صالحی |
| مارکز | میرزا آقا عسگری ( مانی ) |
| پیغام سر گشاده | شورای نویسندگان |
| در مورد آرشیو | |
| داستان | |
| فصل های بی سر انجام | فریبا چلبی یانی |
| یک شاخه شب بو | عباس صحرائی |
| پایان مراسم | علیرضا قانع |
| شعر | |
| تجدید عهد | مینا اسدی |
| آبی وار مال من | شهلا آقاپور |
| ناروا دستور کار است | زهرا جلالی |
| مرگ برگ | حمید مصدق |
| تا کجا ؟ | صحرائی |
| من نور را دوست دارم | محمود صفریان |